यूएस स्टूडेंट वीजा पर ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला जो हर भारतीय को पता होना चाहिए

यूएस स्टूडेंट वीजा पर ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला जो हर भारतीय को पता होना चाहिए

अमेरिका में पढ़ाई करने या वहां रहकर रिपोर्टिंग करने का सपना देखने वालों के लिए एक बड़ी और परेशान करने वाली खबर है। ट्रंप प्रशासन ने दशकों पुराने वीजा नियमों को पूरी तरह से बदल दिया है। अब तक विदेशी छात्रों को मिलने वाली 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' की आजादी खत्म हो गई है। इसका मतलब है कि अब आप जब तक चाहें तब तक पढ़ाई के बहाने अमेरिका में टिक नहीं सकते। नए नियम बेहद कड़े हैं और यह सीधे तौर पर हजारों भारतीय छात्रों और पत्रकारों को प्रभावित करने वाले हैं।

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने १६ जुलाई २०२६ को इसका अंतिम नोटिफिकेशन जारी कर दिया। यह नया नियम १५ सितंबर २०२६ से लागू होने जा रहा है। अगर आप अमेरिका जाने की सोच रहे हैं या पहले से वहां हैं, तो आपको इस नए बदलाव को बहुत बारीकी से समझना होगा। Expanding on this theme, you can find more in: Why Naheed Nenshi Shifting To Calgary Is The Only Real Play For The Alberta Ndp.

क्या है 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' और यह क्यों खत्म हुआ

अभी तक होता यह था कि जब कोई छात्र एफ-1 (F-1) वीजा पर अमेरिका जाता था, तो उसके वीजा पर रुकने की कोई निश्चित तारीख नहीं लिखी होती थी। वहां लिखा होता था 'डी/एस' यानी ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस। इसका मतलब था कि जब तक आप अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं या प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कर रहे हैं, आप कानूनी तौर पर अमेरिका में रह सकते हैं। कई लोग इसका फायदा उठाकर एक के बाद एक नए कोर्स में एडमिशन लेते रहते थे और सालों साल अमेरिका में बने रहते थे।

ट्रंप सरकार का कहना है कि इस लूपहोल की वजह से सुरक्षा संबंधी चिंताएं खड़ी हो रही थीं। सरकार के पास इसका कोई सीधा हिसाब नहीं था कि कौन सा छात्र असल में पढ़ाई कर रहा है और कौन सिर्फ रहने के लिए कॉलेज बदल रहा है। इसलिए अब इस व्यवस्था को हमेशा के लिए दफन कर दिया गया है। Observers at Al Jazeera have shared their thoughts on this trend.

नए नियमों में क्या बदल गया है

अब आपकी मर्जी नहीं चलेगी। नए नियमों के तहत छात्रों और मीडिया कर्मियों के लिए रुकने की एक तय समय सीमा तय कर दी गई है।

  • चार साल की अधिकतम सीमा: अब एफ (F) और जे (J) वीजा धारकों को सिर्फ उनके कोर्स की अवधि या अधिकतम चार साल के लिए ही रहने की अनुमति मिलेगी। अगर आपका कोर्स चार साल से लंबा है, तो आपको रुकने के लिए बकायदा एक्सटेंशन यानी विस्तार के लिए आवेदन करना होगा।
  • पत्रकारों पर सबसे बड़ी गाज: विदेशी पत्रकारों (I वीजा) के लिए मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब उन्हें एक बार में सिर्फ २४० दिनों के लिए ही अमेरिका में रहने की अनुमति मिलेगी। चीनी पत्रकारों के लिए तो यह सीमा सिर्फ ९० दिनों की होगी।
  • आधा रह गया ग्रेस पीरियड: पहले कोर्स खत्म होने के बाद छात्रों को देश छोड़ने या नया कॉलेज ढूंढने के लिए ६० दिनों का समय मिलता था। नए नियमों में इसे घटाकर सिर्फ ३० दिन कर दिया गया है। यानी डिग्री हाथ में आते ही आपको तत्काल फैसला लेना होगा, नहीं तो आप अवैध अप्रवासी मान लिए जाएंगे।
  • कोर्स बदलने पर सख्त पाबंदी: पोस्ट-ग्रेजुएट छात्र अब बिना आधिकारिक अनुमति के अपनी पढ़ाई का विषय (एजुकेशनल ऑब्जेक्टिव) नहीं बदल सकते और न ही आसानी से किसी दूसरे स्कूल या यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर ले सकते हैं।

आंकड़ों की नजर में अमेरिका की चिंता

ट्रंप प्रशासन का दावा है कि अमेरिका में विदेशी छात्रों और पत्रकारों की बाढ़ आ गई है जिससे निगरानी करना असंभव होता जा रहा था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल २०२४ में अमेरिका में १.८ मिलियन से ज्यादा छात्र वीजा पर दाखिले हुए, जो पिछले साल की तुलना में ११ फीसदी ज्यादा थे। इसके साथ ही, ५ लाख से अधिक एक्सचेंज विजिटर्स और लगभग ३७,३०० विदेशी मीडियाकर्मी अमेरिका पहुंचे थे।

सरकार का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर लोगों की निगरानी के लिए मौजूदा सिस्टम नाकाफी था। इसलिए वीजा धारकों को बार-बार सरकारी जांच (वेटिंग) से गुजरने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

एक्सपर्ट्स क्यों इस फैसले का विरोध कर रहे हैं

इस फैसले को लेकर अमेरिका के अंदर ही तीखी बहस शुरू हो गई है। पूर्व गृह सुरक्षा अधिकारी डग रैंड का कहना है कि ज्यादातर अमेरिकी समझते हैं कि विदेशी छात्रों का स्वागत करने से देश को फायदा होता है, लेकिन यह नया नियम केवल कागजी कार्रवाई और लालफीताशाही को बढ़ाएगा।

काटो इंस्टीट्यूट के इमिग्रेशन एक्सपर्ट डेविड जे. बियर ने तो और भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि जिन छात्रों ने अमेरिका में पढ़ाई करते हुए अपने जीवन के कई साल बिताए हैं, उन्हें कोर्स पूरा करने के बाद केवल ३० दिन का समय देना पूरी तरह अव्यावहारिक है। इतने कम समय में किसी छात्र के लिए नौकरी ढूंढना या स्पॉन्सरशिप हासिल करना लगभग नामुमकिन जैसा है।

भारतीय छात्रों को अब क्या करना चाहिए

अगर आप इस समय अमेरिका में पढ़ रहे हैं या जल्द ही जाने वाले हैं, तो आपको बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

सबसे पहले अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस से तुरंत संपर्क करें। यह पता लगाएं कि आपके फॉर्म I-20 पर प्रोग्राम खत्म होने की आखिरी तारीख क्या है। अगर आपको लगता है कि आपकी पढ़ाई ४ साल में पूरी नहीं होगी, तो एक्सटेंशन की प्रक्रिया को समय रहते समझ लें।

अब आप आखिरी सेमेस्टर तक नौकरी ढूंढने का इंतजार नहीं कर सकते। पढ़ाई खत्म होने से कम से कम ६ महीने पहले से ही नौकरी की तलाश शुरू कर दें, क्योंकि कोर्स पूरा होने के बाद आपके पास सोचने के लिए सिर्फ ३० दिन का ही समय बचेगा।

DW

David White

A trusted voice in digital journalism, David White blends analytical rigor with an engaging narrative style to bring important stories to life.